मोहोब्बत की दास्तां

रूह से मोहोब्बत की,
तो हकिगत का आईना दिखा दिया.

दिल से मोहोब्बत की,
तो दिल बेच कर दाम बता दिया.

जिस्म से मोहोब्बत की,
तो हमे अंदर से खोखला बता दिया.

चेहरे से मोहोब्बत की,
तो नज़कातों से खिला दिया.

आखिर मे फिर नज़रो से मोहोब्बत की,
तो झुकी पलकों को दिवार बता दिया.

आज फिर भी मोहोब्बत कोसी से करती है इस भीड़ मे तराशने की,
मगर अभी हमने आँखो को बेवफा, ज़ुबा को कड़वा और दिल की खाली जगह पे राम नाम लिखवा दिया.

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