आखरी मोहोब्बत.

अभ ऐसी मोहोब्बत करनी है…
जिसमे या तो आबाद हो जाए, या बर्बाद हो जाए.
साला ज़िन्दगी मे कुछ कर सके की नहीं,
आशिक़ी का थपा तो लगा के ही जाए.

ना सोचना है, ना उम्मीद रखनी है
वो दरिया है, मे मछली हु
बस यही ज़िन्दगी की छबि रखनी है.

कितनी हसरते है दिल की देखना है.
कितनी तलब मचती है उसे चुने की,देखना है.
लफ्ज़ो की कितनी कला है उसे निहारने की,देखना है.
आखिर ज़िन्दगी कैसे रूकती है उसके रूठने से, देखना है.

देखने का मतलब जीना है.
सिर्फ ख्वाइश नहीं तमना है,
हमें भी इश्क़ का मतलब समझना है.

अभ ऐसी मोहोब्बत करनी है..
जिसमे या तो आबाद हो जाए, या बर्बाद हो जाए.
साला ज़िन्दगी मे कुछ कर सके की नहीं,
आशिक़ी का थपा तो लगा के ही जाए.

सुना है उसको फूलो से इकरार है,
और किताबों से दोस्ती.
चाँद पे घर तो नहीं, मगर ज़मीं पे बाग़
और किताबों की दुकान तो नहीं, मगर दुकान मे अपनी किताब
इतना तो उसके नाम कर के जाना है.

ख्वाइशें उसकी, वक़्त मेरा,
सोच मेरी, फैसला उसका.
हक़ उसका, दिल मेरा,
हालत मेरी, समझना उसका.
वादे उसके, साथ रहना मेरा,
मुश्किलें मेरी, आँचल उसका.
आंसू उसके, बाहे मेरी,
मुश्कुराहट मेरी,साया उसका.
आखिर मे..
वो मेरी, मे उसका
पूरी कविता है सोच मेरी, मगर इसको हकिगत मे बदलने का मत उसका.

अभ ऐसी मोहोब्बत करनी है..
जिसमे या तो आबाद हो जाए, या बर्बाद हो जाए.
साला ज़िन्दगी मे कुछ कर सके की नहीं,
आशिक़ी का थपा तो लगा के ही जाए.

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